पारिवारिक
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गरीबी से करोड़ों तक
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इंदौर की सर्द सुबह थी। शहर की मशहूर गलियों में हल्की धूप उतर रही थी और दुकानों के शटर धीरे-धीरे खुल रहे थे। उसी शहर के एक पुराने मोहल्ले में, टूटी हुई छत वाले छोटे से घर में रहने वाला 16 साल का लड़का हर दिन की तरह सुब...
Storyline
इंदौर की सर्द सुबह थी। शहर की मशहूर गलियों में हल्की धूप उतर रही थी और दुकानों के शटर धीरे-धीरे खुल रहे थे। उसी शहर के एक पुराने मोहल्ले में, टूटी हुई छत वाले छोटे से घर में रहने वाला 16 साल का लड़का हर दिन की तरह सुबह चार बजे उठ चुका था। उसका नाम था विवान। उसके पिता पहले मजदूरी करते थे, लेकिन एक दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी। घर में माँ और छोटी बहन थी। माँ लोगों के घरों में झाड़ू-पोंछा करती थीं और विवान स्कूल जाने से पहले चाय का ठेला लगाता था।
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