सस्पेंस थ्रिलर
सस्पेंस थ्रिलर
भगत कथा
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भूमिका :
मिथिलाक गाम सभमे राति जल्दी उतरैत छै।
साँझ ढलिते खेतक ऊपर धुँआ सन कुहासा पसरए लगैत छै, आ बाँसक झुरमुट बीच सँ अबैत हवा संग अनेक कथा उड़ैत फिरैत छै भूतक कथा, डायनक कथा, गुम भेल लोकक कथा आ सभसँ बेसी बच्चा चो...
मिथिलाक गाम सभमे राति जल्दी उतरैत छै।
साँझ ढलिते खेतक ऊपर धुँआ सन कुहासा पसरए लगैत छै, आ बाँसक झुरमुट बीच सँ अबैत हवा संग अनेक कथा उड़ैत फिरैत छै भूतक कथा, डायनक कथा, गुम भेल लोकक कथा आ सभसँ बेसी बच्चा चो...
Storyline
भूमिका :
मिथिलाक गाम सभमे राति जल्दी उतरैत छै।
साँझ ढलिते खेतक ऊपर धुँआ सन कुहासा पसरए लगैत छै, आ बाँसक झुरमुट बीच सँ अबैत हवा संग अनेक कथा उड़ैत फिरैत छै भूतक कथा, डायनक कथा, गुम भेल लोकक कथा आ सभसँ बेसी बच्चा चोरीक कथा।
ई कथा ओहि समयक अछि जखन गामक लोकक दुनिया अखबार सँ नहि, अफवाह सँ चलैत छल।जखन जाति आदमीक इज्जत तय करैत छल। जखन गरीबक आवाज पंचायत धरि नहि पहुँचैत छल। आ जखन भीड़ साँच सुनबाक पहिने फैसला सुना दैत छल।
मधुबनी जिलाक एक छोट गाम — सीतापुर। धानक खेत, पोखैर, माटिक घर, दुर्गा पूजाक मेला आ बाहर सँ शांत दिखैत जीवन। मुदा एहि शांत गामक भीतर एक एहन अन्हार दबा रहल छल जे वर्षौं सँ लोकक डर बनल छल।
लोक कहैत छल रातिमे चीनी मिलक खंडहर लग बच्चाक रोबाक आवाज अबैत छै।कहियो-कहियो कोनो साया जंगलमे घूमैत देखाइ पड़ैत छै।आ एहि सभक बीच एक नाम धीरे-धीरे डर बनि गेल छल — “भगता।”
कोनो ओकरा ओझा कहैत छल।.कोनो तांत्रिक। कोनो बच्चा चोर। आ कोनो… राक्षस।
मुदा हर कथा ओहन नहि होइत छै जकरा लोक सुनबैत छै।
दिल्लीमे पढ़ए वाली कृति जखन दुर्गा पूजाक छुट्टीमे अपन गाम लौटैत अछि, तखन ओकरा नहि मालूम रहैत छै जे ई यात्रा ओकर जीवन बदलि देत।
एकटा मेला…
एकटा बच्चाक रोआँ…
एकटा पुरान चीनी मिल…
आ एक आदमी, जकरा पूरा गाम राक्षस मानैत छल।
धीरे-धीरे कृतिके बुझाइ पड़ैत छै जे असली डर भूत-प्रेत नहि होइत छै।
असल डर होइत छै — सत्ता, लालच, जाति आ भीड़क अंधविश्वास।
“भगता कथा” केवल रहस्यक कथा नहि अछि।
ई ओहि समाजक आइना अछि जतय साँच प्रायः सभसँ कमजोर आदमी संग दफना देल जाइत छै।
मिथिलाक गाम सभमे राति जल्दी उतरैत छै।
साँझ ढलिते खेतक ऊपर धुँआ सन कुहासा पसरए लगैत छै, आ बाँसक झुरमुट बीच सँ अबैत हवा संग अनेक कथा उड़ैत फिरैत छै भूतक कथा, डायनक कथा, गुम भेल लोकक कथा आ सभसँ बेसी बच्चा चोरीक कथा।
ई कथा ओहि समयक अछि जखन गामक लोकक दुनिया अखबार सँ नहि, अफवाह सँ चलैत छल।जखन जाति आदमीक इज्जत तय करैत छल। जखन गरीबक आवाज पंचायत धरि नहि पहुँचैत छल। आ जखन भीड़ साँच सुनबाक पहिने फैसला सुना दैत छल।
मधुबनी जिलाक एक छोट गाम — सीतापुर। धानक खेत, पोखैर, माटिक घर, दुर्गा पूजाक मेला आ बाहर सँ शांत दिखैत जीवन। मुदा एहि शांत गामक भीतर एक एहन अन्हार दबा रहल छल जे वर्षौं सँ लोकक डर बनल छल।
लोक कहैत छल रातिमे चीनी मिलक खंडहर लग बच्चाक रोबाक आवाज अबैत छै।कहियो-कहियो कोनो साया जंगलमे घूमैत देखाइ पड़ैत छै।आ एहि सभक बीच एक नाम धीरे-धीरे डर बनि गेल छल — “भगता।”
कोनो ओकरा ओझा कहैत छल।.कोनो तांत्रिक। कोनो बच्चा चोर। आ कोनो… राक्षस।
मुदा हर कथा ओहन नहि होइत छै जकरा लोक सुनबैत छै।
दिल्लीमे पढ़ए वाली कृति जखन दुर्गा पूजाक छुट्टीमे अपन गाम लौटैत अछि, तखन ओकरा नहि मालूम रहैत छै जे ई यात्रा ओकर जीवन बदलि देत।
एकटा मेला…
एकटा बच्चाक रोआँ…
एकटा पुरान चीनी मिल…
आ एक आदमी, जकरा पूरा गाम राक्षस मानैत छल।
धीरे-धीरे कृतिके बुझाइ पड़ैत छै जे असली डर भूत-प्रेत नहि होइत छै।
असल डर होइत छै — सत्ता, लालच, जाति आ भीड़क अंधविश्वास।
“भगता कथा” केवल रहस्यक कथा नहि अछि।
ई ओहि समाजक आइना अछि जतय साँच प्रायः सभसँ कमजोर आदमी संग दफना देल जाइत छै।
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