देखो हँस न देना
देखो हँस न देना
फिर से आय गई प्रधानी
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फिर से आय गई प्रधानी फिर से आय गई प्रधानी
चाय-बीडी, गुटखा-दारू, बँटे जइसे गंगा कय पानी।
फिर से आय गई प्रधानी फिर से आय गई प्रधानी
फिर से गली-गांव में दीखिहैं नेता, कर्मठ अउर जुझारू,
फिर से हाथ जोड़ के गली-गली मा...
चाय-बीडी, गुटखा-दारू, बँटे जइसे गंगा कय पानी।
फिर से आय गई प्रधानी फिर से आय गई प्रधानी
फिर से गली-गांव में दीखिहैं नेता, कर्मठ अउर जुझारू,
फिर से हाथ जोड़ के गली-गली मा...
Storyline
फिर से आय गई प्रधानी फिर से आय गई प्रधानी
चाय-बीडी, गुटखा-दारू, बँटे जइसे गंगा कय पानी।
फिर से आय गई प्रधानी फिर से आय गई प्रधानी
फिर से गली-गांव में दीखिहैं नेता, कर्मठ अउर जुझारू,
फिर से हाथ जोड़ के गली-गली मा घूमिहैं मर्द अउर मेहरारू।
फिर से चार लोग चौराहे पर बैठि के करिहे चाय पर चर्चा,
फिर से गहना बेचिके, भुई बेचिके भरीहैं प्रधानी क पर्चा।
फिर से वोट क खातिर गली-गली मा घूमिहै मर्द अउर जनानी,
फिर से आय गई प्रधानी फिर से आय गई प्रधानी
फिर से दूर कमाए, गंवा शहर जे, उन्हुके के जाये बोलावा,
फिर से यारी-दोस्ती कै दै के हवाला, दिया जाए भाड़ा अउर केरावा।
फिर से घर-घर मा बिना मतलब कै बढ़ जाए आवा-जावा,
फिर से हम केतना नीक हई, तोहरे खातिर तुह्का जाए समझावा।
फिर से सुनि के उम्मीदवार कै मीठी बोली, चीनी भी होई जाए पानी-पानी,
फिर से आय गई प्रधानी फिर से आय गई प्रधानी
फिर से रुपया-पैसा बाटा जाए, फिर से झूठा वादा जाए पेला,
फिर से करब सब काम तोहार जिताय दा हमका जाए बोला।
फिर से खेत-मेड पगडंडी, चक्रोट अउर नाली कै झगड़ा सुलझावै कै वादा,
फिर से ईमानदार, शरीफ अउर नीक मनई मिलिहै तुह्का कुछ ज्यादा।
फिर से जीत लिऐ जौन दिल तोहार सब बोलिहै ऐसी बानी,
फिर से आय गई प्रधानी फिर से आय गई प्रधानी
फिर से जीत के कुर्सी बैठि के, नेता जी हो जइहैं अनजान,
फिर से पाँच बरिस खातिर बंद हो जइहैं दरवाजा अउर कान।
फिर से सड़क, नाली, पानी कै फाइल कोने मा परा धूल खाई,
फिर से अगिला चुनाव तलक जनता बस मन मा सपना सजाई।,
फिर से पाँच बरिस तक झेले गांव की जनता आपन नादानी,
फिर से आय गई प्रधानी फिर से आय गई प्रधानी
चाय-बीडी, गुटखा-दारू, बँटे जइसे गंगा कय पानी।
फिर से आय गई प्रधानी फिर से आय गई प्रधानी
फिर से गली-गांव में दीखिहैं नेता, कर्मठ अउर जुझारू,
फिर से हाथ जोड़ के गली-गली मा घूमिहैं मर्द अउर मेहरारू।
फिर से चार लोग चौराहे पर बैठि के करिहे चाय पर चर्चा,
फिर से गहना बेचिके, भुई बेचिके भरीहैं प्रधानी क पर्चा।
फिर से वोट क खातिर गली-गली मा घूमिहै मर्द अउर जनानी,
फिर से आय गई प्रधानी फिर से आय गई प्रधानी
फिर से दूर कमाए, गंवा शहर जे, उन्हुके के जाये बोलावा,
फिर से यारी-दोस्ती कै दै के हवाला, दिया जाए भाड़ा अउर केरावा।
फिर से घर-घर मा बिना मतलब कै बढ़ जाए आवा-जावा,
फिर से हम केतना नीक हई, तोहरे खातिर तुह्का जाए समझावा।
फिर से सुनि के उम्मीदवार कै मीठी बोली, चीनी भी होई जाए पानी-पानी,
फिर से आय गई प्रधानी फिर से आय गई प्रधानी
फिर से रुपया-पैसा बाटा जाए, फिर से झूठा वादा जाए पेला,
फिर से करब सब काम तोहार जिताय दा हमका जाए बोला।
फिर से खेत-मेड पगडंडी, चक्रोट अउर नाली कै झगड़ा सुलझावै कै वादा,
फिर से ईमानदार, शरीफ अउर नीक मनई मिलिहै तुह्का कुछ ज्यादा।
फिर से जीत लिऐ जौन दिल तोहार सब बोलिहै ऐसी बानी,
फिर से आय गई प्रधानी फिर से आय गई प्रधानी
फिर से जीत के कुर्सी बैठि के, नेता जी हो जइहैं अनजान,
फिर से पाँच बरिस खातिर बंद हो जइहैं दरवाजा अउर कान।
फिर से सड़क, नाली, पानी कै फाइल कोने मा परा धूल खाई,
फिर से अगिला चुनाव तलक जनता बस मन मा सपना सजाई।,
फिर से पाँच बरिस तक झेले गांव की जनता आपन नादानी,
फिर से आय गई प्रधानी फिर से आय गई प्रधानी
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