सामाजिक
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परछाइयों का खेल
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यह कहानी केवल एक दुल्हन के शादी के मंडप से गायब होने की रहस्यमयी घटना नहीं है, बल्कि यह मध्यमवर्गीय परिवारों के भीतर दबे घुटन, झूठी प्रतिष्ठा और अधूरे सपनों का एक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण है। प्रियांशी, जो एक संस्कारी और...
Storyline
यह कहानी केवल एक दुल्हन के शादी के मंडप से गायब होने की रहस्यमयी घटना नहीं है, बल्कि यह मध्यमवर्गीय परिवारों के भीतर दबे घुटन, झूठी प्रतिष्ठा और अधूरे सपनों का एक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण है। प्रियांशी, जो एक संस्कारी और शांत लड़की मानी जाती थी, अपनी शादी की रात अचानक गायब होकर पूरे खानदान को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर देती है, जहाँ 'इज्जत' और 'अस्तित्व' के बीच जंग छिड़ जाती है।
कहानी नॉन-लीनियर (Non-linear) शैली में चलते हुए अतीत के उन हिस्सों को उधेड़ती है, जहाँ प्रियांशी का सामना सोमेश जैसे विद्रोही विचारों वाले युवक से होता है, जो उसे समाज के बनाए 'सांचों' को तोड़ने के लिए उकसाता है। वहीं, उसका मंगेतर तनिष्क, जो सुरक्षा और स्थिरता को ही प्यार समझता है, अपनी हार और प्रियांशी की खामोशी के बीच उलझ जाता है। जैसे-जैसे उपन्यास आगे बढ़ता है, परिवार के अन्य पात्रों जैसे शुभम, शांता देवी और राजवीर सिंह के भी स्याह पक्ष सामने आते हैं।
उपन्यास के ५० भागों में यह गुत्थी सुलझेगी कि क्या प्रियांशी वाकई सोमेश के साथ भागी है, या वह खुद को खोजने के किसी अकेले सफर पर निकल गई है। साथ ही, तनिष्क के भाई करणवीर की रहस्यमयी चुप्पी और उस अनजान नंबर से आने वाले फोन कॉल्स कहानी में गहरे मोड़ लाएंगे। अंत तक आते-आते, यह कहानी एक अधूरापन छोड़ जाएगी, जो पाठक को यह सोचने पर मजबूर कर देगा कि क्या हम वाकई अपनों को जानते हैं, या हम सिर्फ उनके उन चेहरों से प्यार करते हैं जो वे हमें दिखाते हैं।
कहानी नॉन-लीनियर (Non-linear) शैली में चलते हुए अतीत के उन हिस्सों को उधेड़ती है, जहाँ प्रियांशी का सामना सोमेश जैसे विद्रोही विचारों वाले युवक से होता है, जो उसे समाज के बनाए 'सांचों' को तोड़ने के लिए उकसाता है। वहीं, उसका मंगेतर तनिष्क, जो सुरक्षा और स्थिरता को ही प्यार समझता है, अपनी हार और प्रियांशी की खामोशी के बीच उलझ जाता है। जैसे-जैसे उपन्यास आगे बढ़ता है, परिवार के अन्य पात्रों जैसे शुभम, शांता देवी और राजवीर सिंह के भी स्याह पक्ष सामने आते हैं।
उपन्यास के ५० भागों में यह गुत्थी सुलझेगी कि क्या प्रियांशी वाकई सोमेश के साथ भागी है, या वह खुद को खोजने के किसी अकेले सफर पर निकल गई है। साथ ही, तनिष्क के भाई करणवीर की रहस्यमयी चुप्पी और उस अनजान नंबर से आने वाले फोन कॉल्स कहानी में गहरे मोड़ लाएंगे। अंत तक आते-आते, यह कहानी एक अधूरापन छोड़ जाएगी, जो पाठक को यह सोचने पर मजबूर कर देगा कि क्या हम वाकई अपनों को जानते हैं, या हम सिर्फ उनके उन चेहरों से प्यार करते हैं जो वे हमें दिखाते हैं।
All Chapters (26)
Chapter 1
परछाइयों का खेल - Chapter 1
Feb 01, 2026
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Chapter 2
परछाइयों का खेल - Chapter 2
Feb 01, 2026
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Chapter 3
परछाइयों का खेल - Chapter 3
Feb 01, 2026
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Chapter 4
परछाइयों का खेल - Chapter 4
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Chapter 5
परछाइयों का खेल - Chapter 5
Feb 01, 2026
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Chapter 6
परछाइयों का खेल - Chapter 6
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Chapter 7
परछाइयों का खेल - Chapter 7
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Chapter 8
परछाइयों का खेल - Chapter 8
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Chapter 9
परछाइयों का खेल - Chapter 9
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Chapter 10
परछाइयों का खेल - Chapter 10
Feb 01, 2026
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Chapter 11
परछाइयों का खेल - Chapter 11
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Chapter 12
परछाइयों का खेल - Chapter 12
Feb 01, 2026
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Chapter 13
परछाइयों का खेल - Chapter 13
Feb 01, 2026
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Chapter 14
परछाइयों का खेल - Chapter 14
Feb 01, 2026
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Chapter 15
परछाइयों का खेल - Chapter 15
Feb 01, 2026
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Chapter 16
परछाइयों का खेल - Chapter 16
Feb 01, 2026
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Chapter 17
परछाइयों का खेल - Chapter 17
Feb 01, 2026
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Chapter 18
परछाइयों का खेल - Chapter 18
Feb 01, 2026
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Chapter 19
परछाइयों का खेल - Chapter 19
Feb 02, 2026
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Chapter 20
परछाइयों का खेल - Chapter 20
Feb 02, 2026
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Chapter 21
परछाइयों का खेल - Chapter 21
Feb 04, 2026
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Chapter 22
परछाइयों का खेल - Chapter 22
Feb 04, 2026
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Chapter 23
परछाइयों का खेल - Chapter 23
Feb 04, 2026
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Chapter 24
परछाइयों का खेल - Chapter 24
Feb 04, 2026
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Chapter 25
परछाइयों का खेल - Chapter 25
Feb 04, 2026
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Chapter 26
परछाइयों का खेल - Chapter 26
Feb 09, 2026
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