काव्य पुस्तक
काव्य पुस्तक
वो हमारे कहलाएंगे
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कहीं किसी रोज़ वो हमारे बनेंगे ज़रूर, जिस तरह सताया उन्होंने हमें, हम भी उन्हें उस तरह से सताएंगे ज़रूर।