सस्पेंस थ्रिलर
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सपनों की उड़ान' – एक ऐसी कहानी जो आपकी भी हो सकती है
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अध्याय 1: मेरी खामोशी, मेरी पहचान
"सुबह के 6 बजे हैं। अलार्म की ज़रूरत नहीं पड़ी, क्योंकि नींद अब बोझ नहीं, एक सुकून भरी चादर है। मैंने खिड़की खोली, तो देवदार के पेड़ों से टकराकर आती ठंडी हवा ने मेरे चेहरे को छुआ।...
"सुबह के 6 बजे हैं। अलार्म की ज़रूरत नहीं पड़ी, क्योंकि नींद अब बोझ नहीं, एक सुकून भरी चादर है। मैंने खिड़की खोली, तो देवदार के पेड़ों से टकराकर आती ठंडी हवा ने मेरे चेहरे को छुआ।...
Storyline
अध्याय 1: मेरी खामोशी, मेरी पहचान
"सुबह के 6 बजे हैं। अलार्म की ज़रूरत नहीं पड़ी, क्योंकि नींद अब बोझ नहीं, एक सुकून भरी चादर है। मैंने खिड़की खोली, तो देवदार के पेड़ों से टकराकर आती ठंडी हवा ने मेरे चेहरे को छुआ। दूर कहीं बादलों के बीच से सूरज झाँक रहा है।
नीचे रसोई में अदरक कूटने की आवाज़ और फिर उबलती चाय की खुशबू... यह चाय आज कड़वी नहीं, बल्कि जीत जैसी मीठी लग रही है। इस घर के कोने-कोने में मेरी पसंद के रंग हैं। वह मेज, जहाँ मेरी पुरानी डायरियां और नई किताबें रखी हैं, अब मेरी सबसे अच्छी दोस्त है।
आज जब मैं पीछे मुड़कर उस छोटे से गाँव और उन कड़वी बातों को याद करती हूँ, तो मुझे गुस्सा नहीं आता। बल्कि एक दया महसूस होती है। उनकी 'Disrespect' ने ही तो मुझे यहाँ तक पहुँचने का रास्ता दिखाया। मेरी खामोशी ने आज वह जवाब दे दिया है, जो चिल्लाकर कभी नहीं दिया जा सकता था।"
"सुबह के 6 बजे हैं। अलार्म की ज़रूरत नहीं पड़ी, क्योंकि नींद अब बोझ नहीं, एक सुकून भरी चादर है। मैंने खिड़की खोली, तो देवदार के पेड़ों से टकराकर आती ठंडी हवा ने मेरे चेहरे को छुआ। दूर कहीं बादलों के बीच से सूरज झाँक रहा है।
नीचे रसोई में अदरक कूटने की आवाज़ और फिर उबलती चाय की खुशबू... यह चाय आज कड़वी नहीं, बल्कि जीत जैसी मीठी लग रही है। इस घर के कोने-कोने में मेरी पसंद के रंग हैं। वह मेज, जहाँ मेरी पुरानी डायरियां और नई किताबें रखी हैं, अब मेरी सबसे अच्छी दोस्त है।
आज जब मैं पीछे मुड़कर उस छोटे से गाँव और उन कड़वी बातों को याद करती हूँ, तो मुझे गुस्सा नहीं आता। बल्कि एक दया महसूस होती है। उनकी 'Disrespect' ने ही तो मुझे यहाँ तक पहुँचने का रास्ता दिखाया। मेरी खामोशी ने आज वह जवाब दे दिया है, जो चिल्लाकर कभी नहीं दिया जा सकता था।"
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