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मुर्दों की ट्रेन
डरना मना है
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मुर्दों की ट्रेन

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‘मुर्दों की ट्रेन’ एक आधुनिक, गहन भयावह उपन्यास है, जो भारतीय रेलवे की उन अनकही, अंधेरी रातों में साँस लेता है, जहाँ समय रुकता नहीं, बल्कि लूप में फँस जाता है। मुख्य पात्र विहान, एक मध्यमवर्गीय युवक, जो अपने अतीत के ब...
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Storyline

‘मुर्दों की ट्रेन’ एक आधुनिक, गहन भयावह उपन्यास है, जो भारतीय रेलवे की उन अनकही, अंधेरी रातों में साँस लेता है, जहाँ समय रुकता नहीं, बल्कि लूप में फँस जाता है। मुख्य पात्र विहान, एक मध्यमवर्गीय युवक, जो अपने अतीत के बोझ और पारिवारिक अपराधबोध से जूझ रहा है, रात के किसी सुनसान स्टेशन—झिलमिलिया—से एक ऐसी ट्रेन में चढ़ जाता है, जो कभी रुकती नहीं, न ही किसी जीवित को उतरने देती है।

ट्रेन का हर कोच एक अलग मंज़िल नहीं, बल्कि एक अलग कालखंड है—जहाँ मुर्दे यात्रा करते हैं, साँस लेते हैं, बात करते हैं, और कभी-कभी जीवितों को भी अपना हिस्सा बना लेते हैं। कोच बदलते जाते हैं, लेकिन स्टेशन वही रहता है—झिलमिलिया—बार-बार, अनंत चक्कर में। ट्रेन की दीवारें साँस लेती हैं, खिड़कियाँ बाहर की छायाओं को अंदर बुलाती हैं, और सीटें गर्म रहती हैं, जैसे अभी-अभी कोई उठा हो।

यह कहानी सिर्फ़ भूत-प्रेत की नहीं है। यह उस आंतरिक भय की है, जो पीढ़ियों से चली आ रही सामाजिक जकड़नों, छिपे हुए अपराधबोधों, और उन रिश्तों में दबी हुई चुप्पियों से जन्म लेता है, जिन्हें हम नाम नहीं देते। विहान का संघर्ष बाहर की ट्रेन से ज़्यादा अपने भीतर की ट्रेन से है—जो उसे बार-बार उसी स्टेशन पर लौटा लाती है, जहाँ से उसने कभी भागने की कोशिश की थी।

उपन्यास की भाषा धीमी, सिनेमाई और ज़मीन से जुड़ी है। हर दृश्य में ठहराव है—लाल आपातकालीन बल्ब की टिमटिमाहट, फर्श पर बने नन्हे पैरों के निशान, हवा में सड़े फूलों की महक, और साँसों की वह लगातार गूँज जो कभी इंसान की नहीं लगती। संवाद बहुत कम हैं, पर जब आते हैं, तो वे पात्रों के मनोविज्ञान और सामाजिक स्थान को खोल देते हैं।

यह एक ऐसी ट्रेन है, जिसमें चढ़ना आसान है, उतरना लगभग असंभव। और जो उतर भी जाए, वह फिर कभी वही इंसान नहीं रहता।
क्या विहान उतर पाएगा? या वह भी उनमें शामिल हो जाएगा, जो हमेशा यात्रा करते रहते हैं—बिना मंज़िल के, बिना अंत के?

All Chapters (25)

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मुर्दों की ट्रेन - Chapter 1
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मुर्दों की ट्रेन - Chapter 2
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मुर्दों की ट्रेन - Chapter 6
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मुर्दों की ट्रेन - Chapter 7
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Chapter 11
मुर्दों की ट्रेन - Chapter 11
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Chapter 12
मुर्दों की ट्रेन - Chapter 12
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Chapter 13
मुर्दों की ट्रेन - Chapter 13
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Chapter 14
मुर्दों की ट्रेन - Chapter 14
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Chapter 15
मुर्दों की ट्रेन - Chapter 15
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Chapter 16
मुर्दों की ट्रेन - Chapter 16
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Chapter 17
मुर्दों की ट्रेन - Chapter 17
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मुर्दों की ट्रेन - Chapter 18
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Chapter 19
मुर्दों की ट्रेन - Chapter 19
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Chapter 20
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Chapter 21
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Chapter 22
मुर्दों की ट्रेन - Chapter 22
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Chapter 23
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Chapter 24
मुर्दों की ट्रेन - Chapter 24
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Chapter 25
मुर्दों की ट्रेन - Chapter 25
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Anil garg
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