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डर
डरना मना है
डरना मना है

डर

By Amit
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“डर” एक ऐसे लेखक विवेक की कहानी है,
जो कभी एक आम इंसान था।
उसकी ज़िन्दगी में कुछ ऐसी अलौकिक और अजीब घटनाएँ घटती हैं,
जिन्होंने उसका पूरा जीवन बदल दिया।

विवेक अब एक मशहूर writer है —
उसकी कहानियाँ जैसे “नर...
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Storyline

“डर” एक ऐसे लेखक विवेक की कहानी है,
जो कभी एक आम इंसान था।
उसकी ज़िन्दगी में कुछ ऐसी अलौकिक और अजीब घटनाएँ घटती हैं,
जिन्होंने उसका पूरा जीवन बदल दिया।

विवेक अब एक मशहूर writer है —
उसकी कहानियाँ जैसे “नर-भेड़िया”, “हवेली”, “पिशाचों की दुनिया”, “वो औरत”
और “एक रात” लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
लेकिन कोई नहीं जानता कि इन कहानियों की जड़ उसकी अपनी ज़िन्दगी में छिपी है।

सालों बाद, विवेक अब अपनी सच्ची कहानी लिखने बैठा है —
वो सच्चाई जिसे उसने बरसों छिपाया था।
वो पहली बार बताने जा रहा है कि कैसे
उसके बचपन का एक साया, एक आवाज़, और एक अनदेखा डर
धीरे-धीरे उसकी रूह का हिस्सा बन गया।

“डर” सिर्फ़ भूत-प्रेत या परछाइयों की कहानी नहीं है —
ये कहानी है उस डर की,
जो हर इंसान के अंदर कहीं न कहीं जीवित रहता है —
चाहे वो स्वीकार करे या नहीं।

All Chapters (9)

Chapter 0
डर
Nov 11, 2025
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Chapter 1
कोई पीछे है।
Nov 11, 2025
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Chapter 2
आवाज़
Nov 11, 2025
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Chapter 3
नीम के नीचे फिर वही
Nov 11, 2025
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Chapter 4
वो जो नीम के पीछे था
Nov 11, 2025
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Chapter 5
सन्नाटे की आवाज़
Nov 11, 2025
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Chapter 6
चेहरा जो मेरा नहीं था
Nov 11, 2025
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Chapter 7
अंतिम पन्ना
Nov 11, 2025
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Chapter 8
अंतिम
Nov 11, 2025
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