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Khubsurt mohbbat
लव स्टोरी
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Khubsurt mohbbat

5.0 (1 Reviews) 5 Reads Completed
आसमान पर काले बादलों ने अपना राज़ जमा लिया था। बिजली की कड़क से पूरी फ़िज़ा काँप रही थी। अचानक हवाएँ थम गईं... जैसे पूरी कायनात किसी के आने का इंतज़ार कर रही हो। अगले ही पल... काले धुएँ का एक विशाल भँवर उठा और उसके बी...
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Storyline

आसमान पर काले बादलों ने अपना राज़ जमा लिया था। बिजली की कड़क से पूरी फ़िज़ा काँप रही थी। अचानक हवाएँ थम गईं... जैसे पूरी कायनात किसी के आने का इंतज़ार कर रही हो। अगले ही पल... काले धुएँ का एक विशाल भँवर उठा और उसके बीच से एक शख़्स बाहर निकला। ज़यान जिनज़ाद। वह सिर्फ़ एक जिन्न नहीं था... वह जिन्नों की सल्तनत का सबसे ताक़तवर, सबसे ख़ौफ़नाक और सबसे रहमदिल बादशाह था। छह फ़ुट पाँच इंच लंबा कद, चौड़े कंधे, तराशा हुआ ****, बर्फ़ जैसी गोरी रंगत, कमर तक आते रेशमी काले बाल और गहरी सुनहरी आँखें... जिनमें देखते ही बड़े-बड़े योद्धाओं का दिल काँप उठता था। उसके चेहरे की ख़ूबसूरती ऐसी थी कि चाँद भी उसके सामने फीका पड़ जाए, लेकिन उसके चेहरे का रौब ऐसा कि कोई उसकी आँखों में आँखें डालकर देखने की हिम्मत न कर सके। उसके **** से निकलने वाला नूर और रुतबा ही उसकी पहचान था। कहते हैं... ज़यान के एक इशारे पर लाखों जिन्न, अफ़रीत और रूहानी फ़ौजें सजदे में झुक जाती थीं। उसके ग़ुस्से से पहाड़ राख बन जाते, समंदर उफान मारने लगते और आसमान तक काँप उठता था। मगर उसकी असली पहचान उसकी ताक़त नहीं... उसका इंसाफ़ था। वह बेगुनाह पर कभी ज़ुल्म नहीं करता था। मज़लूम की एक पुकार पर पूरी सल्तनत हिला देता था। यतीमों, कमज़ोरों और बेबसों का सहारा बनना ही उसका उसूल था। लेकिन... जो किसी मासूम की तरफ़ बुरी नज़र उठाता... ज़यान उसके लिए क़यामत बन जाता था। उसकी तलवार म्यान से निकल जाए, तो वापस लौटने से पहले किसी ज़ालिम का अंत तय होता था। जिन्नों की दुनिया उसे सिर्फ़ बादशाह नहीं... "शाह-ए-जिन्नात, सुल्तान-ए-अज़मत और रहमत का मालिक" कहकर पुकारती थी। उसकी शख़्सियत में ख़ौफ़ भी था, रहम दिल....भी था.. दूसरी तरफ... माहिरा खान जिसकी दुनिया पूरी मस्ती मे ही रहती है हरदम मस्ती करना लोगो को परसान करना कभी किसी के घर की बेल बजा देना लब्धि किसी चीनी की जगह चाय मे नमक डाल देना माहिर बेहद खूबसूरत लम्बे लम्बे बाल पिंक पतले पतले ओठ उम्र 17 साल...... उसकी फॅमिली मे बस उसके अम्मी अब्बू ही है दोनो कभी कभी उसकी हरकत पर गुस्सा हो जाते कभी हस देते है उन्ही दोनो के अस पास उसकी दुनिया घूमती है... अगली सुबह... सुबह की हल्की-हल्की सुनहरी धूप खिड़की से छनकर कमरे में आ रही थी। बाहर पेड़ों पर बैठे पंछियों की चहचहाहट पूरे माहौल को खुशनुमा बना रही थी। "माहिरा...! उठ जाओ, स्कूल नहीं जाना क्या?" अम्मी ने कमरे के बाहर से आवाज़ लगाई। बिस्तर पर चादर में मुँह छिपाए माहिरा ने करवट बदली और उनींदी आवाज़ में बोली, "अम्मी... पाँच मिनट और..." "ये पाँच मिनट तुम्हारे कभी खत्म नहीं होते।" आखिरकार अम्मी खुद कमरे में आईं और चादर खींच ली। "अरे अम्मी!" माहिरा ने मुँह फुला लिया, "इतनी भी क्या जल्दी है?" "जल्दी नहीं करूँगी तो स्कूल की बस चली जाएगी।" माहिरा मुस्कुराते हुए उठी, जल्दी-जल्दी तैयार हुई। सफेद शर्ट, नीली स्कर्ट, गले में टाई और कंधे पर स्कूल बैग... खुले लंबे बालों को अम्मी ने दो प्यारी-सी चोटियों में बाँध........

What Readers Say

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2 months ago
wow 🤩
❤ 15 Khubsurt mohbbat - Chapter 1

All Chapters (3)

Chapter 1
Khubsurt mohbbat - Chapter 1
Aug 01, 2026
Read
Chapter 3
Khubsurt mohbbat - Chapter 3
Aug 01, 2026
Read
Chapter 4
Khubsurt mohbbat - Chapter 4
Aug 02, 2026
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★★★★★ Khubsurt mohbbat - Chapter 1 2 months ago
Try
wow 🤩
2 months ago ❤ 15 Open Chapter