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कुछ तुम कहो

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कुछ तुम कहो,
कुछ हम कहें,
मिलकर लिखें एक नई गाथा।

जिसमें न हो
किसी दुःख का एहसास,
न हो जीने-मरने का कोई वादा,
बस हो एक सुकून।

तुम्हारे शब्द,
मेरी बात,
मिलकर बनें एक खामोश सी शुरुआत।

न बंधन हो,
न कोई श...

Storyline

कुछ तुम कहो,
कुछ हम कहें,
मिलकर लिखें एक नई गाथा।

जिसमें न हो
किसी दुःख का एहसास,
न हो जीने-मरने का कोई वादा,
बस हो एक सुकून।

तुम्हारे शब्द,
मेरी बात,
मिलकर बनें एक खामोश सी शुरुआत।

न बंधन हो,
न कोई शोर,
बस दिल के भीतर
ठहरता सा एक सुकून।

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