काव्य
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कुछ तुम कहो
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कुछ तुम कहो,
कुछ हम कहें,
मिलकर लिखें एक नई गाथा।
जिसमें न हो
किसी दुःख का एहसास,
न हो जीने-मरने का कोई वादा,
बस हो एक सुकून।
तुम्हारे शब्द,
मेरी बात,
मिलकर बनें एक खामोश सी शुरुआत।
न बंधन हो,
न कोई श...
कुछ हम कहें,
मिलकर लिखें एक नई गाथा।
जिसमें न हो
किसी दुःख का एहसास,
न हो जीने-मरने का कोई वादा,
बस हो एक सुकून।
तुम्हारे शब्द,
मेरी बात,
मिलकर बनें एक खामोश सी शुरुआत।
न बंधन हो,
न कोई श...
Storyline
कुछ तुम कहो,
कुछ हम कहें,
मिलकर लिखें एक नई गाथा।
जिसमें न हो
किसी दुःख का एहसास,
न हो जीने-मरने का कोई वादा,
बस हो एक सुकून।
तुम्हारे शब्द,
मेरी बात,
मिलकर बनें एक खामोश सी शुरुआत।
न बंधन हो,
न कोई शोर,
बस दिल के भीतर
ठहरता सा एक सुकून।
कुछ हम कहें,
मिलकर लिखें एक नई गाथा।
जिसमें न हो
किसी दुःख का एहसास,
न हो जीने-मरने का कोई वादा,
बस हो एक सुकून।
तुम्हारे शब्द,
मेरी बात,
मिलकर बनें एक खामोश सी शुरुआत।
न बंधन हो,
न कोई शोर,
बस दिल के भीतर
ठहरता सा एक सुकून।
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