काव्य पुस्तक
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तेरी आँखें है गहना
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आब-ए-ज़मज़म सी पाक निगाहों का क्या कहना,
जीवन में जीवन है ये समझाती तेरी ऑंखें है गहना।
सौ शहर की रौनक भी बेहद फ़ीकी तेरे तन के आगे,
महरूम न रहूं इस नूर से हरदम तू मेरे करीब रहना।
चाॅंद सितारों की ख़्वाहिश...
जीवन में जीवन है ये समझाती तेरी ऑंखें है गहना।
सौ शहर की रौनक भी बेहद फ़ीकी तेरे तन के आगे,
महरूम न रहूं इस नूर से हरदम तू मेरे करीब रहना।
चाॅंद सितारों की ख़्वाहिश...
Storyline
आब-ए-ज़मज़म सी पाक निगाहों का क्या कहना,
जीवन में जीवन है ये समझाती तेरी ऑंखें है गहना।
सौ शहर की रौनक भी बेहद फ़ीकी तेरे तन के आगे,
महरूम न रहूं इस नूर से हरदम तू मेरे करीब रहना।
चाॅंद सितारों की ख़्वाहिश नहीं तेरा रुप मेरा खजाना,
तलबगार हूॅं तेरा तेरी चाहत का पैरहन दिल ने पहना।
तौफ़ीक है तू मेरी हर सुबह पहला तेरा ही दीदार चाहूॅं,
हूॅं मैं एक किनारा दूसरा बन तू संग-संग ही मेरे बहना।
बेकल होते दौड़ी आना निदा पर मेरी सदा ही देते सदा,
नहीं आता बेगुनाई दिल को इन्फ़िसाल का दर्द सहना।
माना कि गर्मी-ए-बज़्म है तेरे जलवों की शोखियाॅं जानाॅं,
आशिक की तिश्नगी पर उड़ेल न देना बेरुखी का दहना।
तेरी ही आगोश में पड़े तुझे ही सोचना सुकून देता है साथी,
अंबर है तू इस फ़कीर का लकीरों से फिसल रेत सी न ढ़हना।
जीवन में जीवन है ये समझाती तेरी ऑंखें है गहना।
सौ शहर की रौनक भी बेहद फ़ीकी तेरे तन के आगे,
महरूम न रहूं इस नूर से हरदम तू मेरे करीब रहना।
चाॅंद सितारों की ख़्वाहिश नहीं तेरा रुप मेरा खजाना,
तलबगार हूॅं तेरा तेरी चाहत का पैरहन दिल ने पहना।
तौफ़ीक है तू मेरी हर सुबह पहला तेरा ही दीदार चाहूॅं,
हूॅं मैं एक किनारा दूसरा बन तू संग-संग ही मेरे बहना।
बेकल होते दौड़ी आना निदा पर मेरी सदा ही देते सदा,
नहीं आता बेगुनाई दिल को इन्फ़िसाल का दर्द सहना।
माना कि गर्मी-ए-बज़्म है तेरे जलवों की शोखियाॅं जानाॅं,
आशिक की तिश्नगी पर उड़ेल न देना बेरुखी का दहना।
तेरी ही आगोश में पड़े तुझे ही सोचना सुकून देता है साथी,
अंबर है तू इस फ़कीर का लकीरों से फिसल रेत सी न ढ़हना।
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