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ये इश्क भी न
काव्य पुस्तक
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ये इश्क भी न

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आज सावन की पहली बारिश ने हल्की बूँदा-बाँदी के साथ दस्तक दी है,
दालान में सजे काॅफ़ी टेबल पर पड़ा एक मग मुस्कुरा रहा है,
पास में पड़ी छोटी सी डायरी के पन्ने फ़ड़फ़ड़ा रहे है
अचानक मेरा ध्यान एक पन्ने पर लिखे चं...

Storyline

आज सावन की पहली बारिश ने हल्की बूँदा-बाँदी के साथ दस्तक दी है,
दालान में सजे काॅफ़ी टेबल पर पड़ा एक मग मुस्कुरा रहा है,
पास में पड़ी छोटी सी डायरी के पन्ने फ़ड़फ़ड़ा रहे है
अचानक मेरा ध्यान एक पन्ने पर लिखे चंद शब्दों पर ठहर गया
अंगड़ाई लेकर एक पुरानी याद जाग उठी..
एक शाम जो तुमने मेरे नाम की थी
जिन लम्हों में प्रेम ने मेरे भीतर पहली साँस ली थी
उन प्रेमिल पलों को मैंने अक्षरश: पन्नों पर उकेरा था..
युग्मन को तरसती देह को तुमने आलिंगनबद्ध करते अपने एहसास का एक टुकड़ा मेरे स्पंदन को उपहार में जो दिया था
लबों की तिश्नगी में हरारत भरते तुमने कहा था,

"झील में तैरते धवल कमल सी उजली हसीना करीब आ,
करीब आ मुझे तुम्हारी गर्दन पर ठहरे नुक्ते को चूमकर
प्रेम के गुलाल को छूना है"

मैंने अपने अबीर के आगे परोस दिया था स्वयं को,
तुमने फूल सा उठाया
मैं पराग सी बिखर गई थी
उस दिन मैंने तुम्हारे हर गलत को गलत कहने का अधिकार पा लिया था,
उस दिन लगा मेरे अस्तित्व में अमीरी छाई हुई है
उस दिन लगा मैं दुनिया की सबसे धनवान हूँ..

तुम्हारी ऊँगलियाँ मेरे गेसूओं से खेलते गुफ़्तगू कर रही थी
उस क्रिया को मैंने प्रार्थना का पर्याय लिखा है
तुम्हारे लबों पर अपने लबों की मोहर को साधना का संसार लिखा है..
वो शाम आहा...वो शाम मेरी ज़िन्दगी में जश्न का पैगाम लेकर आई थी,
उस शाम को मैंने प्यासी धरा पहली बारिश को जैसे पल भर में अपने भीतर सोख लेती है उसी तिश्नगी का नाम दिया था..
उस शाम सूरज ने डूबने से प्रतिषेध किया था
तुम्हारे स्पर्श की आतिशों ने मेरी त्वचा को अर्श का उपनाम दिया था, तभी.! तभी तो धूपसली सी महक रही हूँ आज भी,
जो भी मेरे करीब से गुज़रता है ये सवाल ज़रूर पूछता है
"कहो सुंदरी क्या इत्र की झील में न्हाई हो?"
कहाँ कोई उत्तर दे पाती हूँ,
तुम्हारी यादों के झरने में बहते हया का पैरहन ओढ़े मुस्कुरा देती हूँ
ये इश्क भी न, इतना हसीन क्यों होता है?
जिसे होता है वो अपने-आपको जन्नत के द्वार पर खड़ा पाता है..
तिश्नगी का आलम मनुहार करते मांग कर रहा है
ऐसी ही कोई शाम एक बार फिर उपहार में दे जाओ न
सच्ची शाम की बेला बड़ी रोमांटिक होती है।

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