डरना मना है
डरना मना है
"शैतान हवेली का रहस्य"
★
0.0
(0 Reviews)
•
0 Reads
•
Ongoing
रात के ठीक **12 बजे**… तेज़ हवा चल रही थी। आसमान में बादल ऐसे गरज रहे थे जैसे कोई चीख रहा हो।
गाँव के बाहर खड़ी थी — **वो हवेली…** टूटी हुई दीवारें, काले पड़े दरवाज़े, और खिड़कियाँ… जैसे किसी की आ...
गाँव के बाहर खड़ी थी — **वो हवेली…** टूटी हुई दीवारें, काले पड़े दरवाज़े, और खिड़कियाँ… जैसे किसी की आ...
Storyline
रात के ठीक **12 बजे**… तेज़ हवा चल रही थी। आसमान में बादल ऐसे गरज रहे थे जैसे कोई चीख रहा हो।
गाँव के बाहर खड़ी थी — **वो हवेली…** टूटी हुई दीवारें, काले पड़े दरवाज़े, और खिड़कियाँ… जैसे किसी की आँखें अंधेरे में घूर रही हों।
गाँव के बूढ़े रामलाल ने धीरे से कहा— “उधर मत जाना… वो हवेली इंसानों के लिए नहीं है…” लेकिन आरव हँस पड़ा।
“भूत-प्रेत कुछ नहीं होते बाबा…”
उसने अपना बैग उठाया… और हवेली की ओर बढ़ गया।
जैसे ही उसने पहला कदम अंदर रखा… **धड़ाम!!!** दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया। आरव चौंक गया।
“कौन है??” कोई जवाब नहीं… सिर्फ… **फुसफुसाहट…** “वापस जाओ…” आरव ने पीछे मुड़कर देखा… लेकिन अब दरवाज़ा गायब था।
सिर्फ दीवार थी। उसका दिल तेज़ धड़कने लगा। तभी… ऊपर से किसी के चलने की आवाज आई… **ठक… ठक… ठक…** आरव ने टॉर्च ऊपर घुमाई… और जो उसने देखा… उसकी रूह काँप गई… सीढ़ियों पर खड़ी थी एक औरत… सफेद साड़ी… लंबे खुले बाल… और उसका चेहरा…
**पूरा काला…
बिना आँखों के…** और अचानक… वो हँस पड़ी— **“तुम आ ही गए…”** ---
👉 **जारी रहेगा… भाग 2
गाँव के बाहर खड़ी थी — **वो हवेली…** टूटी हुई दीवारें, काले पड़े दरवाज़े, और खिड़कियाँ… जैसे किसी की आँखें अंधेरे में घूर रही हों।
गाँव के बूढ़े रामलाल ने धीरे से कहा— “उधर मत जाना… वो हवेली इंसानों के लिए नहीं है…” लेकिन आरव हँस पड़ा।
“भूत-प्रेत कुछ नहीं होते बाबा…”
उसने अपना बैग उठाया… और हवेली की ओर बढ़ गया।
जैसे ही उसने पहला कदम अंदर रखा… **धड़ाम!!!** दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया। आरव चौंक गया।
“कौन है??” कोई जवाब नहीं… सिर्फ… **फुसफुसाहट…** “वापस जाओ…” आरव ने पीछे मुड़कर देखा… लेकिन अब दरवाज़ा गायब था।
सिर्फ दीवार थी। उसका दिल तेज़ धड़कने लगा। तभी… ऊपर से किसी के चलने की आवाज आई… **ठक… ठक… ठक…** आरव ने टॉर्च ऊपर घुमाई… और जो उसने देखा… उसकी रूह काँप गई… सीढ़ियों पर खड़ी थी एक औरत… सफेद साड़ी… लंबे खुले बाल… और उसका चेहरा…
**पूरा काला…
बिना आँखों के…** और अचानक… वो हँस पड़ी— **“तुम आ ही गए…”** ---
👉 **जारी रहेगा… भाग 2
All Chapters (0)
No chapters available.
No reviews yet.
No comments yet.