डरना मना है
डरना मना है
कुछ कहानियां यूं ही
★
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Ongoing
पाँचवां कमरा
आरव नई रेंट की हुई बिल्डिंग में शिफ्ट हुआ था।
चार कमरे थे साफ़, खाली, शांत।
मकान मालिक ने जाते-जाते बस एक चेतावनी दी
“बेटा… बस पाँचवां कमरा मत खोलना।”
आरव हँसा।
फ्लोर पर कहीं पाँचवां ...
आरव नई रेंट की हुई बिल्डिंग में शिफ्ट हुआ था।
चार कमरे थे साफ़, खाली, शांत।
मकान मालिक ने जाते-जाते बस एक चेतावनी दी
“बेटा… बस पाँचवां कमरा मत खोलना।”
आरव हँसा।
फ्लोर पर कहीं पाँचवां ...
Storyline
पाँचवां कमरा
आरव नई रेंट की हुई बिल्डिंग में शिफ्ट हुआ था।
चार कमरे थे साफ़, खाली, शांत।
मकान मालिक ने जाते-जाते बस एक चेतावनी दी
“बेटा… बस पाँचवां कमरा मत खोलना।”
आरव हँसा।
फ्लोर पर कहीं पाँचवां कमरा था ही नहीं।
या उसने सोचा कि नहीं था।
पहली रात, घर में अजीब खटपट होती रही
जैसे कोई दीवार के भीतर चला हो।
कभी कदमों की आवाज़, कभी धीमी खरोंच।
दूसरी रात, आरव को लगा
दीवार की एक लाइन हल्की-सी उभर रही है,
जैसे दीवार के पीछे कोई दरवाज़ा सांस ले रहा हो।
तीसरी रात, वह जागा
उसके कमरे के सामने एक पतली-सी दरार थी,
साफ़, एकदम सीधी…
दरवाज़े की शक्ल में।
अब उसे एहसास हुआ
यह वही “पाँचवां कमरा” था
जिसका मालिक ने ज़िक्र किया था।
भय और जिज्ञासा की लड़ाई में जिज्ञासा जीत गई।
आरव ने हिम्मत करके उंगली से दरार को छुआ
और दरवाज़ा
धीरे-धीरे
अपने-आप
खुल गया।
अंदर चारों तरफ़ अँधेरा था।
पर बीच में कोई खड़ा था
पीठ उसकी ओर…
धीमे-धीमे काँपता हुआ।
आरव ने कांपते हुए पूछा
“त… तुम कौन हो?”
अँधेरी आकृति ने बिना मुड़े कहा
“मैं चार कमरों वाला किरायेदार हूँ…
और यह पाँचवां कमरा मेरा
निकास है…”
आरव की सांस अटक गई।
उस आकृति ने फिर कहा
“लेकिन तुम…
तुम तो दरवाज़ा खोल चुके हो।
अब मेरी जगह कौन लेगा?”
उसके मुड़ते ही
अंधेरा कमरे से बाहर छलका
और चारों ओर सिर्फ़ एक चीख गूंजी।
अगले दिन मकान मालिक ने दरवाज़ा खटखटाया।
पूरी मंज़िल खाली थी।
सिवाय एक नई चेतावनी के
दीवार पर ताज़ा लिखा हुआ
“पाँचवां कमरा मत खोलना।”
समाप्त
बरगद की चुड़ैल
रात के ग्यारह बजे गोलू बरगद के पेड़ के पास से गुजर रहा था।
अचानक पेड़ से आवाज़ आई
“ओये… रुक! मैं बरगद की चुड़ैल हूं!”
गोलू ने बिना डरे कहा
“अच्छा? तो टॉर्च ऑन कर लूं? आपका चेहरा दिख नहीं रहा।”
चुड़ैल हकबका गई
“अरे, टॉर्च मत जलाना! मैं आज मेकअप नहीं कर पाई!”
गोलू बोला
“फिर डराओगी कैसे?”
चुड़ैल ने झाड़ू पटककर कहा
“इसीलिए तो कह रही हूं, नए जमाने में हॉरर की इज्ज़त ही नहीं बची!”
और मुंह बिचकाते हुए पेड़ की डाल में जाकर बैठ गई
“कल तैयार होकर आऊंगी… तब डरना!”
गोलू हंसता हुआ आगे बढ़ गया।
समाप्त
आरव नई रेंट की हुई बिल्डिंग में शिफ्ट हुआ था।
चार कमरे थे साफ़, खाली, शांत।
मकान मालिक ने जाते-जाते बस एक चेतावनी दी
“बेटा… बस पाँचवां कमरा मत खोलना।”
आरव हँसा।
फ्लोर पर कहीं पाँचवां कमरा था ही नहीं।
या उसने सोचा कि नहीं था।
पहली रात, घर में अजीब खटपट होती रही
जैसे कोई दीवार के भीतर चला हो।
कभी कदमों की आवाज़, कभी धीमी खरोंच।
दूसरी रात, आरव को लगा
दीवार की एक लाइन हल्की-सी उभर रही है,
जैसे दीवार के पीछे कोई दरवाज़ा सांस ले रहा हो।
तीसरी रात, वह जागा
उसके कमरे के सामने एक पतली-सी दरार थी,
साफ़, एकदम सीधी…
दरवाज़े की शक्ल में।
अब उसे एहसास हुआ
यह वही “पाँचवां कमरा” था
जिसका मालिक ने ज़िक्र किया था।
भय और जिज्ञासा की लड़ाई में जिज्ञासा जीत गई।
आरव ने हिम्मत करके उंगली से दरार को छुआ
और दरवाज़ा
धीरे-धीरे
अपने-आप
खुल गया।
अंदर चारों तरफ़ अँधेरा था।
पर बीच में कोई खड़ा था
पीठ उसकी ओर…
धीमे-धीमे काँपता हुआ।
आरव ने कांपते हुए पूछा
“त… तुम कौन हो?”
अँधेरी आकृति ने बिना मुड़े कहा
“मैं चार कमरों वाला किरायेदार हूँ…
और यह पाँचवां कमरा मेरा
निकास है…”
आरव की सांस अटक गई।
उस आकृति ने फिर कहा
“लेकिन तुम…
तुम तो दरवाज़ा खोल चुके हो।
अब मेरी जगह कौन लेगा?”
उसके मुड़ते ही
अंधेरा कमरे से बाहर छलका
और चारों ओर सिर्फ़ एक चीख गूंजी।
अगले दिन मकान मालिक ने दरवाज़ा खटखटाया।
पूरी मंज़िल खाली थी।
सिवाय एक नई चेतावनी के
दीवार पर ताज़ा लिखा हुआ
“पाँचवां कमरा मत खोलना।”
समाप्त
बरगद की चुड़ैल
रात के ग्यारह बजे गोलू बरगद के पेड़ के पास से गुजर रहा था।
अचानक पेड़ से आवाज़ आई
“ओये… रुक! मैं बरगद की चुड़ैल हूं!”
गोलू ने बिना डरे कहा
“अच्छा? तो टॉर्च ऑन कर लूं? आपका चेहरा दिख नहीं रहा।”
चुड़ैल हकबका गई
“अरे, टॉर्च मत जलाना! मैं आज मेकअप नहीं कर पाई!”
गोलू बोला
“फिर डराओगी कैसे?”
चुड़ैल ने झाड़ू पटककर कहा
“इसीलिए तो कह रही हूं, नए जमाने में हॉरर की इज्ज़त ही नहीं बची!”
और मुंह बिचकाते हुए पेड़ की डाल में जाकर बैठ गई
“कल तैयार होकर आऊंगी… तब डरना!”
गोलू हंसता हुआ आगे बढ़ गया।
समाप्त
What Readers Say
View AllAnil garg
9 months ago
बढ़िया कहानी
❤ 0
कुछ कहानियां यूं ही - Chapter 1
स्मृति सिंह
10 months ago
woooooow
❤ 0
कुछ कहानियां यूं ही - Chapter 1
All Chapters (5)
Anil garg
बढ़िया कहानी
9 months ago
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स्मृति सिंह
woooooow
10 months ago
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