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गुलिस्तां छोड़ आया हूं RUNNING
गुलिस्तां छोड़ आया हूं
By Renu singh राधे · 1 ch · 16 reads
“कुछ लम्हे प्यार के” RUNNING
“कुछ लम्हे प्यार के”
By vidhi saini
रश्क है मुझे RUNNING
रश्क है मुझे
By Renu singh राधे · 1 ch · 76 reads
प्रेम की बातें RUNNING
प्रेम की बातें
By Renu singh राधे · 1 ch · 83 reads
याद आते हो इतना RUNNING
याद आते हो इतना
By Neeru saini · 1 ch · 92 reads
शून्य सिर्फ़ अंत नहीं COMPLETED
शून्य सिर्फ़ अंत नहीं
By Paresh Makwana · 1 ch · 104 reads
शून्य से शून्य तक RUNNING
शून्य से शून्य तक
By Renu singh राधे · 1 ch · 96 reads
तुम्हारे लिए RUNNING
तुम्हारे लिए
By Renu singh राधे · 1 ch · 89 reads
तुम बिन RUNNING
तुम बिन
By Renu singh राधे · 1 ch · 85 reads
काव्य संग्रह RUNNING
काव्य संग्रह
By मुकेश दुहन मुकू · 112 ch · 13.5K reads
तड़प लेखक की RUNNING
तड़प लेखक की
By Renu singh राधे · 1 ch · 106 reads
जिंदगी आज है RUNNING
जिंदगी आज है
By Renu singh राधे · 1 ch · 109 reads
जो गुजारी न गई RUNNING
जो गुजारी न गई
By Renu singh राधे
भ्रम जाल RUNNING
भ्रम जाल
By Renu singh राधे · 1 ch · 116 reads
बेजुबान लोग RUNNING
बेजुबान लोग
By Renu singh राधे · 1 ch · 108 reads
कुछ लोग RUNNING
कुछ लोग
By Renu singh राधे · 1 ch · 118 reads
गलती तो होगी ही RUNNING
गलती तो होगी ही
By Renu singh राधे · 1 ch · 91 reads
लफ्ज़ ए हुनर RUNNING
लफ्ज़ ए हुनर
By Renu singh राधे · 1 ch · 104 reads
कड़वे बोल RUNNING
कड़वे बोल
By Renu singh राधे · 1 ch · 93 reads
आखिरी दफा RUNNING
आखिरी दफा
By Renu singh राधे · 1 ch · 111 reads
तेरे हैं तेरे रहेंगे COMPLETED
तेरे हैं तेरे रहेंगे
By Prem Bajaj · 1 ch · 112 reads
तेरी आँखें है गहना COMPLETED
तेरी आँखें है गहना
By bhavna thaker
सरेआम मोहब्बत को रूसवा न कर COMPLETED
सरेआम मोहब्बत को रूसवा न कर
By Prem Bajaj · 1 ch · 106 reads
चाँद ज़रा सा घटता रहा COMPLETED
चाँद ज़रा सा घटता रहा
By Prem Bajaj · 1 ch · 109 reads
तुम क्या जानो COMPLETED
तुम क्या जानो
By Prem Bajaj · 1 ch · 105 reads
मत रोको COMPLETED
मत रोको
By Prem Bajaj · 1 ch · 116 reads
खंजर COMPLETED
खंजर
By Prem Bajaj · 1 ch · 125 reads
सिर्फ मेरे COMPLETED
सिर्फ मेरे
By Prem Bajaj · 1 ch · 101 reads
नपुंसक समाज का हिस्सा हम COMPLETED
नपुंसक समाज का हिस्सा हम
By bhavna thaker
वृद्धाश्रम की वेदना COMPLETED
वृद्धाश्रम की वेदना
By bhavna thaker
आशिकी COMPLETED
आशिकी
By Prem Bajaj · 1 ch · 103 reads
शमां-परवाना COMPLETED
शमां-परवाना
By Prem Bajaj · 1 ch · 106 reads
गुफ्तगू बंद लबों की COMPLETED
गुफ्तगू बंद लबों की
By Prem Bajaj · 1 ch · 109 reads
तेरी एक शाम चुराना चाहती हूँ COMPLETED
तेरी एक शाम चुराना चाहती हूँ
By Prem Bajaj · 1 ch · 119 reads
तूने जो लगाई आग COMPLETED
तूने जो लगाई आग
By Prem Bajaj · 1 ch · 85 reads
जन्नत में ये नज़ारा हो न हो COMPLETED
जन्नत में ये नज़ारा हो न हो
By Prem Bajaj · 1 ch · 115 reads
दिल हमें दे दिया उन्होंने COMPLETED
दिल हमें दे दिया उन्होंने
By Prem Bajaj · 1 ch · 111 reads
गर तुम COMPLETED
गर तुम
By bhavna thaker
सुनों सुखनवरों COMPLETED
सुनों सुखनवरों
By bhavna thaker
प्यासा दिल COMPLETED
प्यासा दिल
By Prem Bajaj · 1 ch · 109 reads